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उ० प्र० के ग्रामीण क्षेत्रो में रूरल टेलीमेडिसिन ई- क्लिनिक के रजिस्ट्रेशन हेतु दैनिक हिन्दुस्तान पेपर 19/05/2023 (वाराणसी एडिसन) पर पढ़े |
रूरल टेलीमेडिसिन ई-क्लिनिक एवं फर्स्ट ऐड प्रोवाइडर सेन्टर हेतु ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रारम्भ APPLY HERE +918448485502 अधिक जानकारी के लिए
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Slide प्राथमिक उपचार क्या है ?

“प्राथमिक चिकित्सा, चिकित्सा विज्ञान का बहुत ही महत्वपूर्ण भाग है किसी भी दुर्घटनाग्रस्त या अचानक बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को किसी प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा जो सीमित उपचार किया जाता है उसे प्राथमिक चिकित्सा(FIRST AID) कहते है”, इसका उद्देश्य कम से कम साधनों में इतनी व्यवस्था करना होता है की चोटग्रस्त/अचानकसे बीमार व्यक्ति को व्यक्ति को सम्यक इलाज कराने की स्थिति में लाने में लगने वाले समय में कम से कम नुकसान हो ।

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भारत सरकार द्वारा मार्च 2020 को टेलीमेडिडसन दूर चिकित्सा (पद्दति) के माध्यम से पंजीकृत चिकित्सक (RMP) को सम्पूर्ण भारत के ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्र में फोन कॉल, मैसेज, वीडियो कॉल, के माध्यम से “Nurse, Allied Health Professional, Mid-Level Health Practitioner, ANM” के सहयोग से इलाज करने हेतु कानूनी मान्यता दी गयी |

Slide ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक उपचारक /टेलीमेडिसिन ई-क्लिनिक
चिकित्सक सहायक की आवश्यकता क्यों है?

भारत एक विशाल विकासशील देश है, राष्ट्र के निर्माण में कुछ मूलभूत आवश्यकताएँ होती है। जिसमें स्वास्थ्य का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है हमारे देश की 80% आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है ।किन्तु शहरी क्षेत्र की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा की समुचित व्यवस्था नही होने के कारण आम लोगो को विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, Read More

  • ★ New Address - H-6/219, Aggarwal Tower, Netaji Subhash Place,Pitampura, Delhi-110034.
  • ★ भारत सरकार द्वारा टेलीमेडिसिन को 25 मार्च 2020 को दिये गये कानूनी मान्यता के कारण काउन्सिल उ0प्र0 के ग्रामीण क्षेत्र मे ग्रामीण टेलीमेडिसिन ई-क्लीनिक का मूल्यांकन इण्डियन रूरल टेलीमेडिसिन सर्विस संस्थान लखनऊ, उ0प्र0 के सहयोग से कर रही है। इच्छुक लोग ग्रामीण प्राथमिक उपचार केन्द्र के साथ टेलीमेडिसिन ई- क्लीनिक का भी रजिस्ट्रेशन करा सकते है।

FIRST AID PARAMEDICAL COUNCIL OF INDIA

FIRST AID PARAMEDICAL COUNCIL OF INDIA is devoted to save the lives of the rural people from any accident or sudden illness by providing first aid and advice through its first aid provider/ rural health advisor as we know Every year in India, according to government figures, around 200,000 people die from road traffic accidents. In the past decade alone, more than 5 million Indians have been severely injured or are now living with a disability from road traffic accidents.

Government data shows that 50 percent of road traffic deaths in India could have been prevented, had the injured received first aid within the first hour after the accident. However, many accident victims are unable to access timely care and prevent further disability due to the lack of first aid medical care & emergency medical services in many parts of the country especially in rural area of the India .Villagers and general public are often the first to respond to a road traffic accident and could play a vital role in supporting accident victims and fill the gap in India’s emergency response system. But many of them lack of the first-aid skills needed to stabilize a patient until an ambulance arrives.Emergency medical care and first aid care is still evolving in India and there’s still a long way to go. The primary reason why many people die on the side of the street waiting for help is because the first aid care is not being addressed as effectively According to the World Health Organization (WHO), nearly 5.8 crore people are dying due to heart stroke in the world in a year.

 स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा टेलीमेडिसिन प्रैक्टिस के लिए 14 मई 2020 को (सं. भा. आ. प.-211 (2)/2019(नैतिकता)/100659.) द्वारा जारी दिशा-निर्देश

1. ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक उपचारक / चिकित्सक सहायक की आवश्यकता क्यों है?
भारत एक विशाल विकासशील देश है, राष्ट्र के निर्माण में कुछ मूलभूत आवश्यकताएँ होती है। जिसमें स्वास्थ्य का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है हमारे देश की 80% आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है । किन्तु शहरी क्षेत्र की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा की समुचित व्यवस्था नही होने के कारण आम लोगो को विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसमे प्रमुख रूप से – मलेरिया, टायफाइड, डायरिया, डिसेन्ट्री, हैजा, पीलिया, निमोनिया, टी. बी., चेचक, फाइलेरिया, पोलियों, शुगर, गलसुआँ, एनीमिया, मधुमेह, ब्लड प्रेशर (रक्त चाप), सर्दी जुकाम, मौसमी बुखार,- Read More

2. प्राथमिक उपचार क्या है? –
“प्राथमिक चिकित्सा, चिकित्सा विज्ञान का बहुत ही महत्वपूर्ण भाग है किसी भी दुर्घटनाग्रस्त या अचानक बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को किसी प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा जो सीमित उपचार किया जाता है उसे प्राथमिक चिकित्सा(First Aid) कहते है”, इसका उद्देश्य कम से कम साधनों में इतनी व्यवस्था करना होता है की चोटग्रस्त/अचानकसे बीमार व्यक्ति को व्यक्ति को सम्यक इलाज कराने की स्थिति में लाने में लगने वाले समय में कम से कम नुकसान हो ।

3.टेलीमेडिसिन (दूर-चिकित्सा पद्धति) क्या है? –
भारत सरकार द्वारा देश के ग्रामीण/दुर्गम क्षेत्रों में निवास कर रहे लोगो के इलाज करने हेतु पंजीकृत चिकित्सक (RMP) जरूरत के अपेक्षा कम उपलब्ध होने के कारण होने वाली कठिनाइयों एवं शहरी अस्पतालों में बढती भीड़ से उत्पन्न समस्यायों को कम करने के लिए मार्च 2020 में टेलीमेडिसिन (दूर चिकित्सा) पद्धति के माध्यम से पंजीकृत चिकित्सक (RMP) को सम्पूर्ण भारत में (दूर चिकित्सा) (फोन कॉल, मेसेज, विडियो कॉल) के माध्यम से केयर गिवर/हेल्थ वर्कर (चिकित्सक सहायक) के सहयोग से इलाज करने हेतु कानूनी मान्यता दिया गया –Read More

4- टेलीमेडिसिन को भारत सरकार द्वारा दी गई कानूनी मान्यता के बारे में :
भारत सरकार ने भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद ( Indian Medical Council) 1956 के अधिनियम का इस्तेमाल करते हुए Indian Medical Council (Professional Counduct, Etiquette, and Ethics) Regulations, 2002 भारतीय आर्युविज्ञान परिषद (व्यवसायिक आचरण शिष्टाचार एवं नैतिकता) विनियमावली 2002 में 25 मार्च 2020 को संशोधित करने के लिए नए अधिनियम बनाये,जो कि भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (व्यवसायिक, आचरण शिष्टाचार एवं नैतिकता) विनियमावलि 2020 Indian Medical Council Read More

5. प्राथमिक उपचारक/रूरल टेलीमेडिसिन ई-क्लिनिक प्रभारी/चिकित्सक सहायक किसे कहते है ?
अचानक से बीमार या दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के प्राण की रक्षा, बिगड़ती स्थिति को रोकने व होने वाली जटिलताओ, परेशानियों को कम करने के लिए ऐसा प्रशिक्षित व्यक्ति जो तब तक प्राथमिक उपचार दे सकें जब तक उक्त व्यक्ति का इलाज किसी भी प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा प्रारम्भ न हो जाएं ऐसे व्यक्ति को प्राथमिक उपचारक कहते है,तथा आवश्यकता पड़ने परपंजीकृत चिकित्सक (RMP) से उचित माध्यम (फोन कॉल, मेसेज, विडियो कॉल)से परामर्श लेकर उसके द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशो के अनुसार इलाज करने वाले व्यक्ति को रूरल टेलीमेडिसिन ई क्लिनिक प्रभारी (चिकित्सक सहायक) कहते है।

6.प्राथमिक उपचारक/चिकित्सक सहायक का कार्यक्षेत्र एवं पहचान:
• कार्यक्षेत्र- सम्पूर्ण भारत (ग्रामीण क्षेत्र)
• कार्यअवधि- पांच साल पर नवीनीकरण कराना होगा
• यूनिफार्म- सफ़ेद एप्रेन मोनोग्राम सहित

7- प्राथमिक उपचारक/ चिकित्सक सहायक (ई-क्लिनिक) की भूमिका :

  1. किसी भी दुर्घटनाग्रस्त या घायल व्यक्ति की अवरुद्ध श्वसन नली को प्राथमिक उपचार देकर प्राण रक्षा करना |
  2. किसी भी दुर्घटनाग्रस्त या घायल व्यक्ति के हो रहे रक्तस्राव को प्राथमिक उपचार देकर रक्त स्राव को रोकना|
  3. किसी भी घायल व्यक्ति की असामान्य श्वसन क्रिया को प्राथमिक उपचार के माध्यम से सामान्य करके प्राण रक्षा करना

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8.चिकित्सक सहायक (केंद्र प्रभारी) औरपंजीकृत चिकित्सक (RMP)के बीच टेलीमेडिसिन परामर्श हेतु कुछ आवश्यक दिशा-निर्देश :

  1. स्वास्थ्य कर्मी के निर्णय के अनुसार चिकित्सक के साथ टेलीपरामर्श आवश्यक है ।
  2. स्वास्थ्य कर्मी को मरीज की सहमती प्राप्त करनी चाहिये ।
  3. स्वास्थ्य कर्मी को टेलीमेडिसिन परामर्श के संभावित इस्तेमाल और सेवाएं स्पष्ट करनी चाहिए ।

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9. आपातकाल के स्थिति में स्वास्थ्य कर्मी की भूमिका:

आपात काल या इमरजेंसी के सभी मामलों में स्वास्थ्यकर्मी को चिकित्सक से तत्काल राहत या प्राथमिक उपचार के उपाय प्राप्त कर चिकित्सक द्वारा दी गयी सलाह के अनुसार प्राथमिक उपचार /तत्काल राहत उपलब्ध करा कर समुचित देखभाल के लिए कही और रेफेर करवा देना चाहिए । स्वास्थ्य कर्मी यह सुनिश्चित करेगा कि मरीज को जल्द से जल्द किसी चिकित्सक के साथ व्यक्तिगत रूप से परामर्श की सलाह दी गयी हो । ऐसे मरीजों के लिए जिनका उचित प्रबन्धन टेलीमेडिसिन के जरिये किया जा सकता है । स्वास्थ्य कर्मी निम्न भूमिका निभाएंगे :-
•चिकित्सक द्वारा उपलब्ध करायी गयी स्वास्थ्य शिक्षा/परामर्श को लागू करवाना |
•चिकित्सक द्वारा प्रेसक्राइब की गयी दवाइयां उपलब्ध करवाना और उसके इलाज के लिए मरीज को उचित सलाह देना ।

10.ग्रामीण प्राथमिक उपचारक के सिद्धांतः

  1. ए. बी. सी. नियम का पालन करना ।
  2. प्रशिक्षित प्राथमिक उपचारक को अपने कार्यक्षेत्र में उपचारक की ड्रेस में रहना चाहिए जिससे
    आवश्यकता पड़ने पर लोग उपचारक की सहायता ले सकें ।
  3. एक प्रशिक्षित प्राथमिक उपचारक को अपना मोबाईल न० आम लोगो को उपलब्ध कराना चाहिए जिससे
    किसी भी आपात स्थिति में उन्हें मदद के लिए बुलाया जा सकें ।

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11. सावधानियां: –

  1. प्राथमिक उपचारक को प्राथमिक चिकित्सा देते समय स्वंय को किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचाने हेतु बचाव सामग्री जैसे- दस्ताने, मास्क, आदि का इस्तेमाल करना चाहिए ।
  2. प्राथमिक उपचारक को प्राथमिक उपचार देते समय इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि उसे या पीड़ित व्यक्ति को किसी प्रकार का संक्रमण न होने पायें ।
  3. प्राथमिक उपचारक को प्राथमिक उपचार देने के बाद अपने शरीर के उस अंग को भलीभांति साबुन अथवा एंटीबायोटिक लोशन आदि से साफकरना चाहिए जिस अंग पर पीड़ित व्यक्ति का रक्त, मल, पेशाब आदि लगा हो ।

12. चेतावनी: –

  1. एक प्राथमिक उपचारक को स्वंय को कभी प्रशिक्षित चिकित्सक नही समझना चाहिए।
  2. प्राथमिक उपचारक को किसी भी दुर्घटनाग्रस्त या बीमार व्यक्ति को मृत घोषित नही करना चाहिए क्योंकि यह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
  3. यदि एक प्राथमिक उपचारक को पीड़ित व्यक्ति की स्वास्थ्य समस्या का सही आंकलन करने के बाद ही उसका प्राथमिक उपचार शुरु करना चाहिए।
  4. यदि पीडित व्यक्ति की स्थिति आप की कार्य क्षमता के बाहर है तो आप उक्त पीड़ित व्यक्ति पर अनावश्यक समय बर्बाद न करें उसे नजदीकी चिकित्सालय केन्द्र पर भेजने का प्रबन्ध करें

13.प्राथमिक उपचारक/ चिकित्सक सहायक (ई-क्लिनिक) द्वारा टेलीमेडिसिन ई-क्लिनिक पर किए जाने वाले प्रमुख कार्य –

  1. अचानक से बीमार या दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के प्राण रक्षा, बिगड़ती स्थिति को रोकने व होने वाली जटिलताओं परेशानियों को कम करने के लिए ऐसा केन्द्र जो ग्रामीण क्षेत्र में हो एवं प्रशिक्षित चिकित्सक (RMP)द्वारा केन्द्र प्रभारी/चिकित्सक सहायक (Nursing, ANM, Allied Health Professional) के सहयोग से (फोन काल, मैसेज, विडियो काल के माध्यम से) इलाज किया जाता है।

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14.Rural Telimedicine E-Clinic And First Aid Provider Center के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश:-

  1. आपके द्वारा जमा कराए गए शपथ पत्र में उल्ल्लिखित कथनों को सत्य मानते हुए आपको काउंसिल में पंजीकृत किया जा रहा है। किसी भी कथन या जमा किये गए दस्तावेजों को असत्य पाए जाने पर काउंसिल से आपकी सदस्यता निरस्त कर आपके खिलाफ उचित कानूनी कार्यवाही की जाएगी ।
  2. आप जब तक काउंसिल के सदस्य रहेंगे तब तक काउंसिल द्वारा दिए गए लिखित / मौखिक दिशा निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा |

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रूरल टेलीमेडिसिन ई-क्लिनिक एवं फर्स्ट ऐड प्रोवाइडर सेन्टर में उपयोग किये जाने वाले उपकरण एवं अन्य उपयोगी सामग्री

साइन बोर्ड मॉडल

सर्टिफिकेट मॉडल

निर्देश-पुस्तिका